रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच तेज हो गई है। सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) ने गिरफ्तार पांच मुख्य आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। सभी आरोपियों से लगातार पांच दिनों तक पूछताछ की जाएगी।
पहले दिन एसआईटी ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मो. उस्मान और मो. एवाद को आमने-सामने बैठाकर सवाल किए।
पूछताछ के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि जब टीडीपीएल कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड थी, तब उसे संवेदनशील भर्ती परीक्षाओं का टेंडर किस आधार पर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस सवाल पर श्वेता गुप्ता संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं।
इसी मामले में सीआईडी ने शनिवार को दो और लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार और अभय तिवारी के सहयोगी अरविंद कुमार शामिल हैं। दोनों पर ओएमआर शीट में हेराफेरी और डेटा टेंपरिंग का आरोप है।
इस बीच, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में चयनित एक अभ्यर्थी के नाम से वायरल आवेदन पत्र ने भी नई बहस छेड़ दी है। हालांकि संबंधित अभ्यर्थी ने वायरल दस्तावेज को अपना पत्र मानने से इनकार किया है।
सीआईडी ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास परीक्षा गड़बड़ी से जुड़ी कोई जानकारी या दस्तावेज हैं, तो वे जांच एजेंसी के साथ साझा करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
वहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में जेएलकेएम ने मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया है। संगठन निष्पक्ष जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहा है।
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