सिमडेगा: केंद्रीय रेशम बोर्ड के ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ (MRMA 2.0) कार्यक्रम के तहत सिमडेगा जिले में तसर रेशम उत्पादक किसानों के लिए वैज्ञानिक किसान संवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन हथकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय, झारखंड के सहयोग से किया गया।
विभिन्न गांवों में आयोजित हुए जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 25 जुलाई और 19 अगस्त को गमरझरिया, 20 अगस्त को लाठानखमन, 21 अगस्त को कल्हाटोली और 22 अगस्त को एडगा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इसके अलावा 18 सितंबर को बाजारटोली और टुटीकेल तथा 19 सितंबर को मसेनिया और डोंगापानी, जोगबहार में भी तसर पालन से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए।
वैज्ञानिक तकनीक अपनाने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान किसानों को वैज्ञानिक तसर पालन पद्धति, मेजबान पौधों के उचित प्रबंधन, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन सहित उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने किसानों को स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण पत्तियों की उपलब्धता, तसर कीटों के बेहतर पालन तथा कीट और रोगों की समय पर पहचान एवं प्रभावी नियंत्रण के बारे में जानकारी दी। साथ ही तसर पालन में स्वच्छता और वैज्ञानिक निगरानी के महत्व पर भी जोर दिया गया।
किसानों की समस्याओं का किया गया समाधान
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गांवों से पहुंचे तसर किसानों ने उत्पादन के दौरान आने वाली स्थानीय समस्याओं और व्यावहारिक चुनौतियों को विशेषज्ञों के सामने रखा। विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं पर तकनीकी जानकारी देते हुए आवश्यक समाधान और सुझाव दिए।
कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. अंकित सिंह और अग्र परियोजना पदाधिकारी, सिमडेगा मोहसिना खातून मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। इसके अलावा शादाब जफर, मानसी डुंगडुंग, धनंजय कुमार, लक्ष्मी बानरा, अमन देवगम और साउ सुंडी समेत विभिन्न गांवों के तसर कृषक मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को तसर रेशम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार के लिए जागरूक करना रहा।


