रांची: केंद्र सरकार के खनिज कानून में संशोधन के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आंदोलन को और व्यापक करने की घोषणा की है। पार्टी की ओर से राज्य के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन के बाद अब जिला मुख्यालयों और इसके बाद राज्य स्तर पर आंदोलन करने की तैयारी की जा रही है।
JMM का कहना है कि MMDR संशोधन कानून से झारखंड के खनिज संसाधनों, खनिज राजस्व और राज्यों के अधिकारों से जुड़े कई सवाल खड़े होते हैं। पार्टी ने कहा कि झारखंड की जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों को लेकर किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा भी उठाया
JMM ने केंद्र और राज्य के बीच बकाये के मुद्दे को भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनाया है। पार्टी के अनुसार झारखंड सरकार लंबे समय से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न बकाये का मुद्दा उठाती रही है।
पार्टी की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक इसमें करीब 1.01 लाख करोड़ रुपये भूमि मुआवजा, लगभग 32 हजार करोड़ रुपये कॉमन कॉज से जुड़े बकाये तथा करीब 2,500 से 2,900 करोड़ रुपये वॉश्ड कोल रॉयल्टी समेत अन्य देनदारियां शामिल हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों और बकाये की प्रकृति को लेकर केंद्र और राज्य के बीच अलग-अलग दावे और कानूनी-प्रशासनिक प्रक्रियाएं रही हैं।
खनन से जुड़े पर्यावरण और विस्थापन का मुद्दा
JMM ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनन गतिविधियों के कारण राज्य को प्रदूषण, विस्थापन, पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। पार्टी का कहना है कि ऐसे में राज्य को उसके खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और अधिकारों से जुड़े विषयों पर राज्य के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जिला मुख्यालयों के बाद राज्य स्तर पर आंदोलन
JMM के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में प्रखंड मुख्यालयों पर विरोध दर्ज कराया गया है। अब अगले चरण में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन आयोजित करने की तैयारी है।
पार्टी ने कहा है कि जब तक केंद्र सरकार झारखंड के हितों से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
JMM ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में इस मुद्दे को सड़क से लेकर संवैधानिक और कानूनी मंचों तक उठाने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई झारखंड के खनिज संसाधनों, राज्य के अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के हितों से जुड़ी है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में JMM और झारखंड सरकार की ओर से रखे गए दावों एवं आंकड़ों को संबंधित पक्ष के बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


