रांची:- MMDR कानून को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को झारखंड के इतिहास और यहां के लोगों के संघर्ष को समझने के बाद ही राज्य के मुद्दों पर बयान देना चाहिए।
विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड की पहचान यहां के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य के निर्माण के लिए बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन समेत कई लोगों ने संघर्ष किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को झारखंड की खनिज संपदा और जनता के हित से ज्यादा कॉरपोरेट हितों की चिंता है। पांडेय ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर पहला अधिकार झारखंड और यहां की जनता का होना चाहिए।
MMDR कानून पर उठाए सवाल
झामुमो महासचिव ने कहा कि भाजपा नेताओं को जनता को भ्रमित करने के बजाय यह बताना चाहिए कि MMDR कानून लागू होने से झारखंड के खनिज अधिकारों और राजस्व पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसी मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठा रही है।
विनोद पांडेय ने कहा कि झामुमो का आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि झारखंड के अधिकार और राज्य के हित को लेकर है। उन्होंने कहा कि झामुमो जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकार के मुद्दे से पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड की संपदा का इस्तेमाल राज्य के विकास और यहां के लोगों के हित में होना चाहिए।


