झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी के बाद अब JPSC बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 का परिणाम भी विवादों में आ गया है। जांच के दौरान सामने आए एक मामले ने परीक्षा प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सीआईडी के समक्ष एक परीक्षा केंद्र की ओएमआर शीट आई है, जिसमें एक अभ्यर्थी ने 100 में केवल 32 प्रश्नों के उत्तर दिए थे। प्रारंभिक उत्तर कुंजी से मिलान करने पर इनमें से सिर्फ 15 उत्तर सही और 17 गलत पाए गए। इसके बावजूद 6 जुलाई को जारी परिणाम में उस अभ्यर्थी को सफल घोषित कर दिया गया। इतने कम सही उत्तरों के बावजूद सफलता मिलने से परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच JPSC ने 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा की मुख्य परीक्षा भी फिलहाल स्थगित कर दी है। यह मुख्य परीक्षा 1, 2 और 3 अगस्त को प्रस्तावित थी। आयोग ने जांच पूरी होने तक परीक्षा पर रोक लगा दी है।
मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर और कथित अनियमितताओं के आरोपी अभय तिवारी ने भी JPSC पीटी परीक्षा पास की थी। बाद में उनका चयन सीजीएल के माध्यम से सरकारी सेवा में हुआ। बताया जा रहा है कि उनके भाई अक्षय तिवारी और भाई की पत्नी का भी सीजीएल के जरिए चयन हुआ था। इस बार की JPSC पीटी परीक्षा में भी अभय तिवारी और अक्षय तिवारी दोनों सफल घोषित हुए थे।
जांच एजेंसियां अब परीक्षा के डिजिटल सर्वर, ओएमआर शीट और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही हैं। आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमित तरीके से चयन कराने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या अन्य अभ्यर्थियों के परिणामों में भी किसी तरह की हेराफेरी की गई है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा परिणाम में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं। JPSC द्वारा मुख्य परीक्षा स्थगित किए जाने के बाद अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हु
ई है।

