JPSC भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा खुलासा, पूर्व अध्यक्ष ख्यांगते पर डिजिटल साक्ष्य मिटाने का आरोप

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रांची: JPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान कई गंभीर बातें सामने आई हैं। सीआईडी की विशेष अदालत ने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष लालबियाकत्लुआंगा ख्यांगते की जमानत याचिका खारिज करते हुए 19 पन्नों का आदेश जारी किया है। आदेश में सीआईडी की केस डायरी का हवाला देते हुए परीक्षा एजेंसी को कथित संरक्षण देने और डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों का उल्लेख किया गया है।

जांच के अनुसार, 22 जुलाई को JPSC कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी के बाद ख्यांगते ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। आरोप है कि पद छोड़ने के दौरान वह सरकारी लैपटॉप और एक पेन ड्राइव अपने साथ ले गए। बाद में इन उपकरणों को मरम्मत के नाम पर भेजे जाने की बात सामने आई।

फॉरेंसिक जांच में कथित तौर पर लैपटॉप और पेन ड्राइव से डेटा डिलीट करने, फाइलों को करप्ट करने और हार्डडिस्क को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के संकेत मिले। अदालत ने इस मामले को डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश के तौर पर गंभीरता से लिया।

पीटी से फाइनल चयन तक कथित रेट कार्ड

केस डायरी में टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अपने जाल में फंसाने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, पीटी पास कराने के लिए करीब 5 लाख रुपये और फाइनल चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक की रकम मांगे जाने की बात सामने आई है।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, ब्लैंक चेक, सादे स्टांप पेपर और हस्ताक्षर किए हुए कागज कथित तौर पर सुरक्षा के तौर पर रखे जाते थे।

सीक्रेट सेल और OMR में कथित हेरफेर

जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक समानांतर ‘सीक्रेट सेल’ बनाया था। आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए मूल उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच बनाई गई और कुछ अभ्यर्थियों के पक्ष में उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव किया गया।

केस डायरी के मुताबिक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मुख्य परीक्षा में 350 से अधिक OMR शीट और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट परीक्षा में 150 से अधिक OMR शीट में कथित छेड़छाड़ की गई।

अभय तिवारी के पिता को लेकर कोर्ट ने रिकॉर्ड सुधारा

इस मामले में अदालत के पिछले आदेश में दर्ज एक तथ्य को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। अदालत ने 5 सितंबर 2026 के अपने आदेश में हुई टाइपिंग की गलती को सुधारते हुए स्पष्ट किया कि सुखदेव तिवारी परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे।

कोर्ट ने कहा कि उनका नाम केवल अभियुक्त अभय कुमार तिवारी के पिता के रूप में पहचान दर्ज करने के संदर्भ में आया था। अभियोजन की संशोधन याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार कर दिया।

नोट: ऊपर लगाए गए आरोप जांच एजेंसी/अदालत के आदेश में बताए गए आरोपों के रूप में लिखे गए हैं। अंतिम दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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