नेपाल से नियामतपुर तक पेपर लीक के आरोप, गिरफ्तारियों के बीच सीबीआई जांच की मांग तेज

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रांची। झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परीक्षा में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने और पैसों के लेनदेन समेत कई गंभीर आरोप आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की ओर से लगाए जाते रहे हैं। अब मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बाद इन आरोपों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने शुरुआत से ही परीक्षा में गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक और कथित आर्थिक लेनदेन को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि जांच के शुरुआती दौर में उनके आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया गया और छात्रों के दावों को गलत ठहराने का प्रयास किया गया।

लगातार गिरफ्तारियों से जांच पर उठ रहे सवाल

मामले में सीआईडी की ओर से लगातार कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जा रही हैं। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बीच अभ्यर्थियों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि क्या जांच केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहेगी या कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और इसके पीछे मौजूद बड़े लोगों तक भी पहुंचेगी।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि यदि पेपर लीक में प्रश्नपत्र, उत्तर उपलब्ध कराने और पैसों के लेनदेन की बात सामने आती है, तो पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष तरीके से जांच जरूरी है।

व्हिसल ब्लोअर की गिरफ्तारी पर भी सवाल

इस पूरे प्रकरण में व्हिसल ब्लोअर के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने रखी थी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के बजाय उसके दावों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।

उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

सीबीआई जांच की मांग

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि मामले की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि राज्य की जांच एजेंसी पर अब भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि जांच केवल छोटे स्तर पर शामिल लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क, प्रश्नपत्र कहां से और कैसे बाहर आया, अभ्यर्थियों तक कैसे पहुंचा और इसमें पैसों का लेनदेन किस स्तर तक हुआ—इन सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।

जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

JSSC-CGL मामले में सामने आ रहे आरोपों की वास्तविकता और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सीआईडी की कार्रवाई जारी है और मामले में नई गिरफ्तारियों के साथ जांच का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।

इधर, आंदोलनकारी अभ्यर्थी लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में ऐसी जांच होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।

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