रांची: नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 के निर्माण को लेकर जमीन का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। गुरुवार को नगड़ी जमीन बचाव संघर्ष समिति और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों की बैठक हुई। बैठक में ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि सरकार किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आंदोलन को नगड़ी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे पूरे झारखंड में व्यापक रूप देने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
जमीन को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाजमीन को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
नगड़ी जमीन बचाव संघर्ष समिति से जुड़े ग्रामीणों का कहना है कि जमीन सिर्फ आर्थिक संपत्ति नहीं है, बल्कि यह उनकी रोजी-रोटी, रोजगार, सामाजिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों ने मांग की कि RIMS-2 जैसी बड़ी परियोजना के लिए जमीन के चयन में रैयतों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वे विकास योजनाओं के विरोधी नहीं हैं। उनका सवाल इस बात को लेकर है कि स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ऐसी जमीन का चयन किया जाए, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर न पड़े।
पुलिस प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
बैठक में कुछ ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने और भय का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें जमीन के मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर कथित अभद्र व्यवहार और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में पुलिस प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
आंदोलन के अगले चरण की तैयारी
बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। इनमें—
पुतला दहन
मशाल जुलूस
रांची में अनिश्चितकालीन धरना
विधायकों के आवास का घेराव
पूरे झारखंड में आंदोलन को विस्तार देना
जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। हालांकि, इन कार्यक्रमों की तारीखों का ऐलान बाद में किए जाने की बात कही गई है।
‘हक की जमीन के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेंगे’
ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेंगे। समिति का कहना है कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकाल सकती है। यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं हुई, तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
सरकार के सामने RIMS-2 और ग्रामीणों के अधिकारों के बीच संतुलन की चुनौती
RIMS-2 को राज्य की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजनाओं में माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना के लिए 207 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। प्रस्तावित परियोजना में बड़े अस्पताल के साथ मेडिकल शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल हैं।
ऐसे में सरकार के सामने एक ओर RIMS-2 परियोजना को आगे बढ़ाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर नगड़ी के ग्रामीणों की जमीन, आजीविका और अधिकारों से जुड़े सवालों का समाधान निकालना भी जरूरी है।
गुरुवार की बैठक के बाद आंदोलन को पूरे झारखंड में फैलाने के ऐलान ने संकेत दिया है कि नगड़ी का RIMS-2 जमीन विवाद आने वाले दिनों में फिर बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।


