रांची:- झारखंड में JPSC-JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग से जुड़े मामले में गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कई पुराने न्यायिक फैसलों का हवाला दिया गया। सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा।
मास लेवल पर चीटिंग होने पर परीक्षा रद्द करने का दिया हवाला
सरकार की ओर से विभिन्न मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि अगर किसी परीक्षा में बड़े स्तर पर नकल या गड़बड़ी साबित होती है, तो पूरी परीक्षा को रद्द किया जा सकता है।
हालांकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक की जांच में यह सामने नहीं आया है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ था।
WhatsApp और Telegram के जरिए पेपर लीक का दावा
वहीं, मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से भी कई न्यायिक फैसलों का हवाला दिया गया। उनकी ओर से दावा किया गया कि WhatsApp और Telegram जैसे सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई है।
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा।
कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता पटवालिया, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन और अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने दलीलें पेश कीं।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा।
अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत का फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि JPSC-JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।


