रांची :- झारखंड में सरकारी अनाज के भंडारण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है। अब राज्य के सभी खाद्यान्न गोदामों की हर तीन महीने में जांच की जाएगी। इस संबंध में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारियों और जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है।
निर्देश के अनुसार, गोदामों की जांच के बाद अधिकारियों को इसकी पूरी रिपोर्ट ऑनलाइन मॉड्यूल में दर्ज करनी होगी। इससे गोदामों में रखे अनाज की उपलब्धता और भंडारण की स्थिति पर नियमित नजर रखी जा सकेगी।
समीक्षा बैठक में सामने आई लापरवाही
विभागीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि कई जगहों पर अधिकारी नियमित रूप से अनाज गोदामों की जांच नहीं कर रहे हैं। इस वजह से गोदामों में कितना अनाज उपलब्ध है और उसके रखरखाव की स्थिति क्या है, इसकी सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
इसी को देखते हुए विभाग ने हर तीन महीने में गोदामों का निरीक्षण करना अनिवार्य किया है।
केंद्र और राज्य योजना का अनाज अलग रखा जाएगा
विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले अनाज को गोदामों में अलग-अलग रखा जाए। दोनों योजनाओं के अनाज का हिसाब भी अलग रखा जाएगा, ताकि वितरण और उपलब्धता की सही जानकारी मिल सके।
अनाज की कमी मिलने पर होगी कार्रवाई
जांच के दौरान किसी गोदाम में अनाज की कमी या बैकलॉग मिलने पर इसकी वजह पता की जाएगी। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई की जानकारी विभाग को भी देनी होगी।
जिला प्रबंधक और आपूर्ति पदाधिकारी होंगे जिम्मेदार
विभाग ने साफ किया है कि भविष्य में किसी गोदाम में अनाज की कमी मिलने पर संबंधित जिला प्रबंधक और जिला आपूर्ति पदाधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार का कहना है कि नियमित जांच और ऑनलाइन रिपोर्टिंग से सरकारी अनाज के भंडारण में पारदर्शिता आएगी। साथ ही गोदामों में अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और राशन वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।


