रांची: मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। केंद्रीय सरना समिति समेत कई आदिवासी संगठनों ने प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया कि आदिवासी एकता महाजुटान के नाम से शुरू हुई रैली बाद में कांग्रेस गठबंधन सरकार की रैली में बदल गई।
संगठनों का आरोप है कि रैली में चर्च की भूमिका को लेकर पहले से विरोध था। उन्होंने पूर्व मंत्री बंधु तिर्की पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि आदिवासी समाज के नेतृत्व में चर्च की भूमिका को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संगठनों ने कहा कि अगर कोई संगठन ईसाई या मसीही समाज के नाम से अपना कार्यक्रम करता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आदिवासियों के नाम पर होने वाले किसी भी आंदोलन में चर्च की भूमिका का विरोध किया जाएगा।
संयुक्त बयान में मुख्य पाहन जगलाल पाहन, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, महासचिव अशोक मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव समेत कई नेताओं के नाम शामिल हैं।
हालांकि, ये आरोप संबंधित संगठनों की ओर से लगाए गए हैं।


