चतरा/कुंदा:- झारखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और एंबुलेंस सेवा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों के बीच चतरा जिले के कुंदा प्रखंड से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को परिजन बाइक से करीब दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाने को मजबूर हुए। इसके बाद मुख्य सड़क पर पहुंची 108 एंबुलेंस से महिला को अस्पताल ले जाया गया।
जानकारी के अनुसार, मामला कुंदा प्रखंड के मरगड़ा पंचायत अंतर्गत जोबिया गांव के भारती टोला (दूधमटिया) का है। बुधवार को राजदीप भारती की गर्भवती पत्नी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी।
हालांकि, गांव तक पहुंचने वाला रास्ता बेहद खराब होने के कारण एंबुलेंस गांव के अंदर नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे और कीचड़ होने के कारण चारपहिया वाहन का आवागमन मुश्किल है। ऐसे में परिजनों ने समय की गंभीरता को देखते हुए महिला को बाइक पर बैठाकर करीब दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से एंबुलेंस के जरिए महिला को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।
बारिश में और बदतर हो जाती है सड़क की स्थिति
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भारती टोला को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग लंबे समय से जर्जर है। बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है। कीचड़ और गड्ढों के कारण एंबुलेंस समेत अन्य चारपहिया वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, आपात स्थिति में मरीजों को कभी बाइक तो कभी चारपाई के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों पर पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की सड़क निर्माण की मांग्रामीणों ने प्रशासन से की सड़क निर्माण की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण सरकारी एंबुलेंस सेवा का लाभ जरूरत के समय गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भारती टोला तक पक्की सड़क का निर्माण कराने अथवा जर्जर मार्ग की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधा तभी प्रभावी होगी, जब मरीज तक एंबुलेंस समय पर पहुंच सके। सड़क की समस्या का समाधान नहीं होने पर भविष्य में किसी गंभीर मरीज के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।


