सरायकेला-खरसावां: जिले के खरसावां प्रखंड अंतर्गत ढलाईकेला पंचायत के बनाईकेला गांव में दो आदिवासी परिवारों ने अपनी इच्छा से मूल आदिवासी धर्म और संस्कृति में वापसी की। घर वापसी करने वाले परिवारों के मुखिया सुनील सोय और लखिन्द्र सोय बताए गए हैं।
दोनों परिवारों की घर वापसी पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ कराई गई। कार्यक्रम में आदिवासी हो समाज महासभा के पदाधिकारी, हातु मुंडा, दियुरी, समाज के बुद्धिजीवी और ग्रामीण मौजूद रहे।
इस दौरान पारंपरिक पूजा-पाठ, नदी स्नान और देशाउली में धार्मिक अनुष्ठान सहित अन्य परंपरागत प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद दोनों परिवारों को गांव और समाज में विधिवत शामिल किया गया।
अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़ने की बात
कार्यक्रम में समाज के लोगों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, पर्व-त्योहार और परंपराओं से जुड़ी है। समाज के अनुसार, दोनों परिवारों ने अपनी इच्छा से अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं में वापस लौटने का फैसला किया है।
घर वापसी करने वाले परिवारों ने कहा कि आगे वे अपने पारंपरिक पर्व-त्योहार, रीति-रिवाज और पूजा-पाठ का पालन करेंगे। उन्होंने समाज के सुख-दुख में साथ रहने और अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने की बात कही।
इनमें मागे पोरोब, बह पोरोब, जोमनामा, हेरो पोरोब, जोनोम दस्तूर, गोनोय दस्तूर, आंदी दस्तूर और आदींग बोंगा पूजा जैसी परंपराओं का पालन करने की बात कही गई।
गांव में दिखा उत्साह
घर वापसी कार्यक्रम को लेकर बनाईकेला गांव में उत्साह देखने को मिला। समाज के लोगों ने दोनों परिवारों का स्वागत किया और इसे अपनी पारंपरिक संस्कृति और समाज से दोबारा जुड़ने की पहल बताया।
कार्यक्रम में आदिवासी हो समाज महासभा की अध्यक्षिका सावित्री कुदादा, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सोय, प्रखंड अध्यक्ष रामलाल हेम्ब्रम समेत समाज के कई पदाधिकारी, बुद्धिजीवी और ग्रामीण उपस्थित रहे।
नोट: घर वापसी के संबंध में ऊपर दी गई जानकारी आयोजकों और समाज की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है।


