
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशामुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की। यह राष्ट्रीय अभियान अगले 100 सप्ताह तक पूरे देश में चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और स्वस्थ, जागरूक तथा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।
प्रधानमंत्री ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि देश के युवाओं को नशे के जाल में फंसने से बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब देश की युवा पीढ़ी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होगी तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत पिछले वर्ष काशी से की गई थी। लोगों के अच्छे सहयोग के बाद अब इसे पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभियान के तहत हर रविवार को कला, संस्कृति, खेल, योग, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि युवा सकारात्मक कार्यों से जुड़ें और नशे से दूर रहें।
सर्वे में सामने आए आंकड़े
भारत में नशीले पदार्थों के उपयोग पर वर्ष 2019 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार:
करीब 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, जिनमें 5.7 करोड़ लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
लगभग 3.1 करोड़ लोग गांजा या भांग (कैनबिस) का उपयोग करते हैं।
करीब 2.26 करोड़ लोग अफीम, हेरोइन और अन्य ओपिओइड नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं।
दुनिया के कई देशों में भी चलाए गए अभियान
दुनिया के कई देशों ने भी नशे के खिलाफ बड़े अभियान चलाए हैं। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस सहित कई देशों ने ड्रग तस्करी और डार्क वेब के जरिए होने वाले नशे के कारोबार पर कार्रवाई की है। वहीं, ब्रिटेन ने भी पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेरोइन नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाया था।
सरकार का कहना है कि इस अभियान में समाज, परिवार, स्कूल, कॉलेज और युवाओं की भागीदारी सबसे अहम होगी। सभी के सहयोग से ही नशामुक्त और विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

