
रांची/जमशेदपुर: राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गुरुवार को जमशेदपुर के माईकल जॉन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम विवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (WDRO) की ओर से आयोजित किया गया था।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस देश के लाखों बुनकरों के परिश्रम, कौशल और रचनात्मकता को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा केवल कपड़े बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का मजबूत प्रतीक है।
राज्यपाल ने भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय चरखा, खादी और हस्तकरघा स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के प्रतीक बन गए थे। उन्होंने महात्मा गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि खादी और स्वदेशी ने देशवासियों में आत्मगौरव की भावना जगाई।
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनजातीय और ग्रामीण परंपराओं में हस्तकरघा और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत है। राज्य का तसर रेशम देशभर में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने बुनकरों के उत्पादों को आधुनिक तकनीक, डिज़ाइन, ब्रांडिंग और डिजिटल माध्यमों से जोड़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ जैसी पहल से बुनकरों और पारंपरिक कारीगरों को मजबूती मिल रही है। उन्होंने युवाओं से भी इस क्षेत्र से जुड़ने की अपील की ताकि रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले कई बुनकरों को सम्मानित किया और लोगों से अपने दैनिक जीवन में हस्तकरघा उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया।


