खनिज वहन भूमि उपकर (JMBL Cess) और प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रस्तावित संशोधन को झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए आर्थिक नुकसान बताया है।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि संशोधन के बाद राज्य सरकारें खनिज वाली भूमि पर केंद्र सरकार की निर्धारित शर्तों के बिना कर, उपकर या अन्य लेवी नहीं लगा सकेंगी। उनके अनुसार इससे राज्यों की वित्तीय क्षमता प्रभावित हो सकती है।
मंत्री ने कहा कि JMBL Cess कोई नई रॉयल्टी या खनिज उत्पादन पर अतिरिक्त रॉयल्टी नहीं है। यह उन जमीनों पर लगाया जाने वाला उपकर है, जिनमें खनिज मौजूद हैं और जिनका खनन किया जा रहा है।
उन्होंने जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024 पारित किया था।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर जोर
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड को खनिज संपदा से राजस्व मिलता है, लेकिन खनन के कारण विस्थापन, भूमि से बेदखली, पर्यावरण को नुकसान, जल और वायु प्रदूषण तथा वन क्षेत्रों पर दबाव जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इसलिए खनिज से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्रों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जाना जरूरी है।
मंत्री के अनुसार JMBL Cess से वर्ष 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपये, 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपये और 2026-27 में अनुमानित 13,215 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, कृषि, आजीविका और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि JMBL Cess झारखंड के लिए केवल राजस्व का स्रोत नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का महत्वपूर्ण आधार भी है। उन्होंने कहा कि झारखंड के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कांग्रेस तथा गठबंधन सरकार प्रस्तावित संशोधन विधेयक का हर स्तर पर विरोध करेगी।


