रांची। आदिवासी छात्र संघ केंद्रीय समिति ने सरना धर्म कोड और प्रस्तावित परिसीमन के मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। शनिवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संघ ने कहा कि सरना धर्म कोड लागू किए बिना जनगणना और परिसीमन का विरोध किया जाएगा।
संघ के प्रवक्ता सह केंद्रीय संयोजक डॉ. सुशील कुमार मिंज ने कहा कि आदिवासी समुदाय की अलग धार्मिक पहचान दर्ज करने के लिए सरना धर्म कोड की मांग लंबे समय से की जा रही है। संघ का आरोप है कि अलग धर्म कोड नहीं होने के कारण आदिवासी आबादी की सही पहचान और आंकड़े प्रभावित होते हैं।
आदिवासी छात्र संघ ने कहा कि “सरना धर्म कोड नहीं तो जनगणना नहीं और जनगणना नहीं तो परिसीमन नहीं” के नारे के साथ आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। संघ के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को गुमला से धर्म कोड लागू कराने और परिसीमन के विरोध में महारैली की शुरुआत की जाएगी।
4 अक्टूबर को रांची में महारैली
संघ ने बताया कि 13-14 सितंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में ऑल इंडिया ट्राइबल कल्चर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है। कार्यक्रम के दौरान सरना धर्म कोड और परिसीमन के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
इसके बाद 4 अक्टूबर 2026 को मोरहाबादी मैदान में बड़ी महारैली आयोजित करने की घोषणा की गई है। संघ ने कहा कि मांगों को लेकर आगे भारत बंद और आर्थिक नाकेबंदी जैसे कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
संवाददाता सम्मेलन में संघ ने पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासियों को मिले संवैधानिक अधिकारों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी उठाई।
कार्यक्रम में डॉ. सुशील कुमार मिंज के अलावा जतरु उरांव, सुरेश टोप्पो, अमृत मुंडा, बादल भोगता, सुजीत भगत, प्यारू उरांव और अखिलेश पहान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
नोट: खबर में आंदोलन और आरोपों से जुड़े दावे आदिवासी छात्र संघ द्वारा संवाददाता सम्मेलन में कही गई बातों पर आधारित हैं।


