रांची: देश में रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिले भारी चंदे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग, आयकर विभाग और केंद्रीय जांच एजेंसियों से ऐसे दलों को मिलने वाले चंदे और उनके खर्च की जांच की मांग की है।
JMM की ओर से जारी बयान में कहा गया कि देश में 2,800 से अधिक राजनीतिक दल रजिस्टर्ड हैं। इनमें कुछ को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है, जबकि बड़ी संख्या में दल रजिस्टर्ड होने के बावजूद गैर-मान्यता प्राप्त हैं।
सैकड़ों करोड़ रुपये चंदा मिलने पर सवाल
JMM ने दावा किया कि कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खातों में सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि मौजूद है। पार्टी के मुताबिक, कुछ दलों के बैंक खातों में करीब 1,000 करोड़, 620 करोड़ और 950 करोड़ रुपये तक की राशि होने की बात सामने आई है। वहीं, सबसे कम राशि वाले दल के खाते में भी करीब 138 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया।
बयान में लोक साही सत्ता पार्टी का उदाहरण देते हुए कहा गया कि 2023-24 में इस पार्टी को करीब 1,045 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है। JMM ने सवाल किया कि जिन राजनीतिक दलों के बारे में आम लोगों को जानकारी तक नहीं है और जिनकी सक्रिय राजनीतिक गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं, उन्हें इतनी बड़ी रकम चंदे के रूप में कैसे मिल रही है।
खर्च के ब्योरे पर भी सवाल
JMM ने कहा कि जिस पार्टी को करीब 1,045 करोड़ रुपये मिलने की बात कही जा रही है, उसके द्वारा बड़ी राशि खर्च किए जाने का विवरण भी दिया गया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि ऐसी राजनीतिक पार्टियां इतनी बड़ी रकम कहां और किस उद्देश्य से खर्च कर रही हैं।
बयान में यह भी कहा गया कि कई ऐसे दलों के कार्यालय बेहद छोटे स्थानों पर बताए जाते हैं या लंबे समय तक बंद रहते हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक कामकाज और करोड़ों रुपये के लेन-देन के बीच तालमेल की जांच जरूरी है।
मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई
JMM ने सवाल उठाया कि कहीं इन राजनीतिक दलों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग या काले धन को सफेद करने का खेल तो नहीं चल रहा है। पार्टी ने यह भी पूछा कि इन दलों को चंदा देने वाले लोगों और संस्थाओं की पहचान कब सार्वजनिक होगी।
पार्टी ने आशंका जताई कि यदि इतनी बड़ी रकम का गलत इस्तेमाल हो रहा है, तो क्या इसका उपयोग राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने या विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त जैसे मामलों में तो नहीं किया जा रहा है।
चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों से कार्रवाई की मांग
JMM ने चुनाव आयोग, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई से पूरे मामले का संज्ञान लेने और वित्तीय लेन-देन की जांच करने की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता जरूरी है। यदि किसी दल के खाते में सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि आती है, तो उसके स्रोत, खर्च और राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी की जांच होनी चाहिए।
JMM ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक दलों का नहीं, बल्कि देश में चुनावी और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय है। संबंधित एजेंसियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।


