बुकरू के पास हर दिन 300 से 400 ट्रकों के गुजरने का दावा, प्रति ट्रक 300 रुपये वसूली का आरोप; ग्रामीणों ने चालकों से की शिकायत करने की अपील
टंडवा/केरेडारी: झारखंड के टंडवा-केरेडारी सीमा क्षेत्र में कोयला ढुलाई करने वाले ट्रकों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। बुकरू के पास कोयला ढुलाई सड़क पर ट्रक चालकों से पैसे लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस मामले में इंटेलिजेंस विभाग के सक्रिय होने की भी चर्चा है। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, चंद्रगुप्त परियोजना से कोयला लेकर निकलने वाले ट्रक बुकरू के पास से गुजरते हैं। आरोप है कि इस रास्ते पर कुछ लोगों की ओर से युवकों को भेजकर ट्रक चालकों से पैसे वसूले जाते हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि कथित वसूली की रकम टंडवा और केरेडारी क्षेत्र के कुछ संबंधित लोगों के बीच बांटी जाती है। हालांकि, रकम के बंटवारे और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रोजाना 90 हजार रुपये की वसूली का दावा
बताया जा रहा है कि इस सड़क से प्रतिदिन करीब 300 से 400 कोयला ढुलाई ट्रक गुजरते हैं। कुछ ट्रक चालकों के अनुसार, प्रत्येक ट्रक से कथित तौर पर 300 रुपये लिए जाते हैं।
यदि 300 ट्रकों से प्रतिदिन 300 रुपये वसूले जाने के दावे को आधार माना जाए, तो रोजाना 90 हजार रुपये की रकम बनती है। इसी हिसाब से 30 दिनों में यह राशि 27 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं, 400 ट्रकों से प्रतिदिन इतनी ही राशि लिए जाने पर कथित वसूली 1.20 लाख रुपये रोजाना और 36 लाख रुपये महीने तक हो सकती है।
हालांकि, ट्रकों की वास्तविक संख्या, पैसे लिए जाने की नियमितता और कुल रकम को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों ने ट्रक चालकों से क्या अपील की?
मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने ट्रक मालिकों और चालकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति जबरन पैसे मांगता है, तो वे इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से करें। ग्रामीणों का कहना है कि कथित अवैध वसूली पर रोक लगनी चाहिए, ताकि ट्रक मालिकों और चालकों को आर्थिक नुकसान न हो।
ग्रामीणों ने ऐसी घटनाओं से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने और उचित माध्यम से प्रशासन व मीडिया तक जानकारी पहुंचाने की भी अपील की है। हालांकि, किसी भी घटना का वीडियो बनाते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस मामले में कथित वसूली करने वालों की पहचान, आरोपों की सच्चाई और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इंटेलिजेंस विभाग की गतिविधियों को लेकर भी चर्चा है, लेकिन किसी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, पूरे मामले में आधिकारिक बयान और जांच के नतीजों का इंतजार है।


