गिरिडीह: झारखंड की गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर अब नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। उपचुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
इसी बीच चर्चा है कि जयराम महतो के नेतृत्व वाली झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) गिरिडीह उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतार सकती है। अगर पार्टी चुनाव मैदान में उतरती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। ऐसे में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
JLKM की एंट्री से दिलचस्प होगा मुकाबला
गिरिडीह विधानसभा सीट पर JLKM की संभावित एंट्री से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। पार्टी के अध्यक्ष जयराम महतो की रणनीति पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। हालांकि, JLKM की ओर से उम्मीदवार को लेकर आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
JMM के सामने सीट बचाने की चुनौती
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह सीट पर JMM के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं, BJP के लिए यह सीट अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर बन सकती है।
ऐसे में यदि JLKM अपना उम्मीदवार उतारती है, तो चुनाव में तीनों दलों के बीच मुकाबले की संभावना बन सकती है। उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख से चुनावी तस्वीर काफी हद तक तय होगी।
जयराम महतो की रणनीति पर टिकी नजरें
गिरिडीह उपचुनाव में JLKM की भूमिका कितनी प्रभावी होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल उपचुनाव की तारीख और उम्मीदवारों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। लेकिन संभावित त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा ने गिरिडीह की राजनीति को पहले से ही गर्मा दिया है।


