रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के नगड़ी गांव में करीब 2.98 एकड़ अधिग्रहित जमीन वापस करने की मांग से जुड़ी याचिका खारिज कर दी है। यह मामला करीब 66 साल पुराने भूमि अधिग्रहण विवाद से संबंधित था।
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब किसी जमीन का कानून के अनुसार अधिग्रहण हो चुका हो, मुआवजा दिया जा चुका हो और जमीन राज्य में निहित हो गई हो, तो उसे पूर्व मालिकों को वापस करने का कानूनी आधार नहीं बनता।
यह मामला W.P.(C) संख्या 4590/2014 से जुड़ा था। नगड़ी गांव के कृष्ण कच्छप समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया था कि उनके पूर्वजों की जमीन बिरसा कृषि महाविद्यालय (अब बिरसा कृषि विश्वविद्यालय) के लिए अधिग्रहित की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अधिग्रहण के बाद जमीन का निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए इसे वापस किया जाना चाहिए।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी। अदालत के फैसले के बाद संबंधित अधिग्रहित जमीन पूर्व मालिकों को वापस किए जाने का रास्ता बंद हो गया है।


