एक बेटा होने पर पांच और दो बेटे होने पर दस घरों से अनाज मांगने की चर्चा, अनाज बेचकर चूड़ियां खरीदने और पूजा करने की बताई जा रही है परंपरा
लावालौंग, चतरा। झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड के कई गांवों में इन दिनों ‘डलिया चलाना’ नाम की एक गतिविधि चर्चा में है। बताया जा रहा है कि कुछ महिलाएं बेटों की सलामती की मान्यता के साथ घर-घर जाकर मक्का, चावल और दूसरे अनाज मांग रही हैं।
स्थानीय स्तर पर प्रचलित इस परंपरा के बारे में बताया जा रहा है कि जिन महिलाओं के एक बेटा है, वे पांच घरों से और जिनके दो बेटे हैं, वे दस घरों से अनाज मांगती हैं। इसके बाद इकट्ठा किए गए अनाज को बेचकर चूड़ियां खरीदने और पूजा-पाठ के बाद उन्हें पहनने की बात कही जा रही है।
बेटों की सलामती से जुड़ी है मान्यता
इस गतिविधि के पीछे यह मान्यता बताई जा रही है कि ऐसा करने से बेटों पर आने वाली परेशानियां और विपत्तियां टल जाती हैं। वहीं, इस प्रक्रिया को नहीं अपनाने पर अनहोनी होने का डर भी बताया जा रहा है।
हालांकि, इस मान्यता के समर्थन में किसी वैज्ञानिक प्रमाण की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रचलित एक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जागरूकता और सही जानकारी जरूरी
बच्चों की सुरक्षा और सलामती हर माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन किसी विशेष रस्म, चूड़ी पहनने या घर-घर अनाज मांगने से बच्चों पर आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित परंपराओं को समझने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना भी जरूरी है। किसी भी मान्यता के कारण लोगों में डर या भ्रम की स्थिति नहीं बननी चाहिए।


