12 घंटे के मजदूर आंदोलन के बाद झुका SFK फैक्ट्री प्रबंधन, बकाया वेतन समेत 8 मांगों पर लिखित समझौता

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इरबा की J1 कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरों ने वेतन, PF-ESI, नियुक्ति पत्र और साप्ताहिक छुट्टी की मांग को लेकर किया आंदोलन, 4 से 5 नवंबर तक बकाया वेतन भुगतान का आश्वासन

 

रांची। राजधानी रांची के इरबा स्थित SFK Manufacturer/J1 कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरों के बकाया वेतन और श्रमिक अधिकारों को लेकर 12 घंटे तक आंदोलन चला। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में शनिवार सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक मजदूरों ने प्रदर्शन किया। आंदोलन में JLKM के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सैकड़ों मजदूर शामिल हुए।

 

मजदूरों का आरोप था कि उन्हें पिछले 3 से 4 महीने से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा कई मजदूरों को नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और वेतन पर्ची भी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। PF, ESI और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर भी मजदूरों ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया।

 

प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद लिखित समझौता

 

लगातार 12 घंटे तक चले आंदोलन के बाद देर रात कंपनी प्रबंधन की ओर से प्रबंधक आदर्श तिवारी के साथ वार्ता हुई। वार्ता में मजदूरों की मांगों पर सहमति बनी और लिखित समझौता किया गया। इसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया।

 

समझौते में मजदूरों की प्रमुख मांगों को पूरा करने के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है।

 

4 से 5 नवंबर तक होगा बकाया वेतन का भुगतान

 

लिखित समझौते के अनुसार, सितंबर 2026 तक का पूरा बकाया वेतन 4 से 5 नवंबर 2026 के बीच भुगतान किया जाएगा। इसमें वर्तमान में काम कर रहे मजदूरों के साथ नौकरी छोड़ चुके मजदूर भी शामिल होंगे।

 

अक्टूबर 2026 का वेतन 15 नवंबर तक देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा आगे से प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक सभी मजदूरों का वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

 

एक महीने में नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और PF-ESI की सुविधा

 

समझौते के अनुसार, एक महीने के अंदर सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और वेतन पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही पात्र मजदूरों को PF और ESI की सुविधा देने पर भी सहमति बनी है।

 

साप्ताहिक छुट्टी और अतिरिक्त काम पर डबल हाजिरी

 

मजदूरों को सप्ताह में एक दिन छुट्टी देने पर सहमति बनी है। समझौते के अनुसार, छुट्टी के दिन काम कराने या निर्धारित आठ घंटे से अधिक काम लेने की स्थिति में डबल हाजिरी दी जाएगी।

 

इसके अलावा मजदूरों की योग्यता और काम के आधार पर वेतन बढ़ाने तथा पदोन्नति देने की बात भी समझौते में शामिल है। अनस्किल्ड से सेमी-स्किल्ड, सेमी-स्किल्ड से स्किल्ड और स्किल्ड से हाईली स्किल्ड श्रेणी में ग्रेड प्रमोशन श्रम विभाग के निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

 

आंदोलन करने वाले मजदूरों पर कार्रवाई नहीं करने की सहमति

 

समझौते में यह भी तय हुआ कि आंदोलन में शामिल किसी मजदूर या कार्यकर्ता को चिह्नित कर नौकरी से नहीं हटाया जाएगा और न ही उसे प्रताड़ित किया जाएगा। उनके खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के कारण कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने पर सहमति बनी है।

 

इसके अलावा आंदोलन के दौरान कंपनी के पदाधिकारियों द्वारा एक वाहन का मोबाइल तोड़े जाने के मामले में प्रबंधन ने नया मोबाइल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।

 

देवेंद्र नाथ महतो ने कंपनियों को दी चेतावनी

 

आंदोलन के बाद JLKM के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड में कंपनियों को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा रवैया छोड़ना होगा। मजदूरों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और मजदूरों की मेहनत से कंपनियां मुनाफा कमाती हैं, लेकिन उन्हीं मजदूरों को समय पर वेतन, न्यूनतम मजदूरी, बोनस, PF, ESI और सम्मानजनक कार्य वातावरण से वंचित रखना उचित नहीं है।

 

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि राज्य में संचालित सभी कंपनियों को श्रम विभाग के नियमों और लागू श्रम कानूनों का पालन करना होगा। मजदूरों को समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने चेतावनी दी कि जो कंपनियां श्रम कानूनों का पालन नहीं करेंगी और मजदूरों का शोषण जारी रखेंगी, उनके खिलाफ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर तालाबंदी का आंदोलन भी किया जाएगा।

 

आंदोलन में JLKM के कई पदाधिकारी रहे शामिल

 

इस आंदोलन में JLKM केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो, अल्पसंख्यक मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद साकिर अंसारी, शाबिर अंसारी, आदिल अनवर, रांची जिला केंद्रीय महासचिव मार्सल महतो, बिराट महतो, जिला सचिव गजेंद्र महतो, रांची जिला वरीय उपाध्यक्ष रिहान अंसारी, प्रवक्ता महावीर साहू, ओरमांझी प्रखंड अध्यक्ष रामसेवक महतो, जगन्नाथ महतो, संतोष महतो, सुधांशु महतो और कोषाध्यक्ष राजू महतो सहित अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सैकड़ों मजदूर मौजूद रहे।

 

लिखित समझौते के बाद मजदूरों ने आंदोलन स्थगित कर दिया है। अब सभी की नजरें कंपनी प्रबंधन पर हैं कि तय समयसीमा के भीतर बकाया वेतन और अन्य सुविधाएं मजदूरों को उपलब्ध कराई जाती हैं या नहीं।

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