रांची:- मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियों के बीच रांची के बिरला मैदान से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो लोगों को प्रेरणा दे रही है। 30 वर्षीय नारायण सेठ एक हाथ से बांस और रस्सियों की मदद से पूजा पंडाल तैयार कर रहे हैं।
नारायण ने करीब 12 साल पहले एक सड़क हादसे में अपना एक हाथ गंवा दिया था। हादसे के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन आगे बढ़ाया। उन्होंने आइसक्रीम फैक्ट्री में काम किया और एक हाथ से तिलकुट कूटने और पलटने का काम भी किया।
पिछले करीब एक दशक से नारायण दुर्गा पूजा के पंडाल बनाने का काम कर रहे हैं। इस बार भी वे बिरला मैदान में मां दुर्गा के भव्य दरबार को तैयार करने में जुटे हैं। बांस के जटिल ढांचे को रस्सियों से बांधते हुए उनकी तस्वीरें सामने आई हैं।
खुद चलाते हैं बड़ी पिकअप गाड़ी
नारायण की कहानी सिर्फ पंडाल निर्माण तक सीमित नहीं है। वह दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद बड़ी पिकअप गाड़ी भी चलाते हैं। एक हाथ से स्टीयरिंग और गियर संभालते हुए वह जयपुर से लेकर आंध्र प्रदेश तक लंबी दूरी का सफर कर चुके हैं।
नारायण का संघर्ष और आत्मविश्वास यह संदेश देता है कि शारीरिक चुनौती इंसान के हौसले को रोक नहीं सकती। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
मां दुर्गा के स्वागत के लिए पंडाल तैयार कर रहे नारायण सेठ की कहानी इन दिनों लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।


