
नई दिल्ली/डांस्क: अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ रहे रॉकेट और सैटेलाइट लॉन्च के बीच अब स्पेस डेब्रिस (अंतरिक्ष मलबा) दुनिया के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। पोलिश स्पेस एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर सप्ताह करीब एक मीट्रिक टन अंतरिक्ष मलबा पृथ्वी के वातावरण में वापस प्रवेश करता है। हालांकि इसका अधिकांश हिस्सा वातावरण में जलकर नष्ट हो जाता है, लेकिन कुछ बड़े टुकड़े जमीन तक पहुंच सकते हैं।
अमेरिकी स्पेस फोर्स ने वर्ष 2025 में करीब 820 अंतरिक्ष वस्तुओं के पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश करने का अलर्ट जारी किया था। हाल ही में केन्या के मुकुकु गांव के पास एक रॉकेट का बड़ा धातु का रिंग खेत में गिरा था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हिस्सा वातावरण में जल जाना चाहिए था, लेकिन वह सुरक्षित अवस्था में जमीन पर पहुंच गया।
बढ़ रहा है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी की कक्षा में लगातार बढ़ रहे सैटेलाइट और रॉकेट मिशनों के कारण अंतरिक्ष मलबे की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। पिछले वर्ष दुनिया भर में 300 से अधिक रॉकेट लॉन्च किए गए, जबकि हजारों सैटेलाइट अभी भी पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। मिशन पूरा होने के बाद इनमें से कई सैटेलाइट वातावरण में लौटते हैं।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का मलबा अमेरिका के फ्लोरिडा में एक घर पर गिरा था। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस में भी अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
2035 तक बढ़ सकता है जोखिम
अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की एक स्टडी के मुताबिक, यदि सैटेलाइट लॉन्च की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो 2035 तक केवल स्पेसएक्स के सैटेलाइट मलबे से हर दो साल में एक बार किसी व्यक्ति के घायल होने या मौत का जोखिम पैदा हो सकता है। ऐसे में अंतरिक्ष मलबे के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।

